36 गढ़ीFEATUREDLatestराष्ट्रीयविविध

हरी खाद, वर्मी कम्पोस्ट और जैविक खाद के उपयोग के लिए किसानों को किया जा रहा प्रोत्साहित

जिले में मृदा स्वास्थ्य सुधार, भूमि की उर्वराशक्ति बनाए रखने और मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा लगातार विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है। किसानों को हरी खाद, जैविक खाद और मृदा परीक्षण आधारित संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए नियमित रूप से प्रोत्साहित एवं जागरूक किया जा रहा है। उप संचालक कृषि जशपुर ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा मृदा स्वास्थ्य सुधार के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

हरी खाद से बढ़ेगा जैविक कार्बन, सुधरेगी मिट्टी की उर्वराशक्ति :

कृषि विभाग द्वारा किसानों को हरी खाद के रूप में ढैंचा, सनई सहित अन्य उपयुक्त फसलों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। हरी खाद के उपयोग से मिट्टी में जैविक पदार्थों और जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ाने में सहायता मिलती है। इसके साथ ही भूमि की संरचना एवं उर्वराशक्ति में सुधार होता है और लंबे समय में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलती है। वर्तमान में राज्य शासन द्वारा संचालित हरी खाद कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को हरी खाद अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य मृदा में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ाना, भूमि की उत्पादन क्षमता को बनाए रखना तथा टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देना है।

गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट और फसल अवशेषों के उपयोग पर जोर :

विभाग द्वारा किसानों को गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट और अन्य जैविक खादों के अधिकाधिक उपयोग के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। इसके साथ ही फसल अवशेषों को जलाने के बजाय खेतों में समावेशित करने के संबंध में किसानों को जागरूक किया जा रहा है, ताकि मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़े और भूमि की उर्वराशक्ति दीर्घकाल तक बनी रहे। कृषि विभाग द्वारा नियमित रूप से प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर किसानों को संतुलित और मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग के संबंध में जानकारी दी जा रही है। विभाग का उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि जैविक एवं रासायनिक स्रोतों के वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग के माध्यम से समेकित पोषक तत्व प्रबंधन को प्रोत्साहित करना है।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड से किसानों को खेतवार मिल रही उर्वरक उपयोग की अनुशंसा :

जिले में मृदा परीक्षण के आधार पर किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रदान किए जाते हैं। इसमें संबंधित खेत की मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों की स्थिति के अनुसार उर्वरकों एवं अन्य पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग की अनुशंसा की जाती है। इससे किसान आवश्यकता के अनुरूप उर्वरकों का उपयोग कर सकते हैं और अनावश्यक अथवा असंतुलित उपयोग से बच सकते हैं। मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से किसानों को यह समझने में भी सहायता मिलती है कि उनके खेत की मिट्टी को किन पोषक तत्वों की आवश्यकता है। इस वैज्ञानिक पद्धति को अपनाने से खेती की लागत को नियंत्रित करने के साथ-साथ मिट्टी के स्वास्थ्य और उत्पादन क्षमता को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलती है।

कृषि विभाग की किसानों से अपील-संतुलित उर्वरक के साथ जैविक खाद का करें अधिकाधिक उपयोग :

कृषि विभाग ने जिले के किसानों से अपील की है कि वे अपने खेतों में उर्वरकों का उपयोग मृदा परीक्षण और कृषि विशेषज्ञों की अनुशंसा के आधार पर ही करें। साथ ही हरी खाद, गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट, अन्य जैविक खादों तथा फसल अवशेषों के समुचित उपयोग को प्राथमिकता दें। विभाग ने कहा है कि मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण केवल वर्तमान फसल के बेहतर उत्पादन के लिए ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए कृषि भूमि की उर्वराशक्ति सुरक्षित रखने के लिए भी आवश्यक है। संतुलित पोषण और जैविक खादों के अधिकाधिक उपयोग से भूमि की उत्पादन क्षमता को दीर्घकाल तक बनाए रखने के साथ टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि को बढ़ावा दिया जा सकता है।

Related Articles

Back to top button