
“भाई का स्नेह, बहनों का अधिकारकृविष्णु भैया के साथ आत्मनिर्भर परिवार।”
’मुनिता स्व-सहायता समूह ने 10 वर्ष की लीज पर तालाब लेकर शुरू किया मछली पालन,
1.20 लाख रूपए के ऋण से संवारा आजीविका का नया साधन’
छत्तीसगढ़ में ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें स्थायी आजीविका से जोड़ने और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित ‘बिहान’ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को ऋण, प्रशिक्षण और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पुहपुटरा की श्रीमती निरा राजवाड़े की कहानी इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल है। मुनिता स्व-सहायता समूह की सचिव निरा राजवाड़े ने समूह की महिलाओं के साथ मिलकर मछली पालन को आजीविका का साधन बनाया है। समूह ने ‘बिहान’ से जुड़कर 1 लाख 20 हजार रूपए का ऋण प्राप्त किया और इस राशि का उपयोग मछली पालन की गतिविधि शुरू करने के लिए किया।
’10 वर्ष की लीज पर तालाब, सामूहिक प्रयास से शुरू हुआ मछली पालन’
निरा राजवाड़े ने बताया कि मुनिता स्व-सहायता समूह ने 10 वर्ष की लीज पर तालाब लिया है। इसी तालाब में समूह की महिलाएं सामूहिक रूप से मछली पालन कर रही हैं। तालाब की देखरेख से लेकर मछली पालन से जुड़े कार्यों तक महिलाएं मिल-जुलकर जिम्मेदारी निभा रही हैं।
समूह का लक्ष्य मछली पालन के माध्यम से नियमित आय का अवसर विकसित करना है। आने वाले समय में मछलियों की बिक्री से प्राप्त होने वाली आय समूह की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ महिलाओं की व्यक्तिगत और पारिवारिक आवश्यकताओं को पूरा करने में भी सहायक बनेगी।
’बिहान से मिला सामूहिक आजीविका का रास्ता’
निरा राजवाड़े बताती हैं कि ‘बिहान’ से जुड़ने से पहले उनके पास नियमित आजीविका का कोई साधन नहीं था। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें अन्य महिलाओं के साथ मिलकर सामूहिक रूप से आर्थिक गतिविधि शुरू करने का अवसर मिला।
वे कहती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं के लिए रोजगार और आय के नए रास्ते खुले हैं। सामूहिक प्रयास से काम करने से उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने की उम्मीद भी मजबूत हुई है।
’स्थानीय संसाधन से रोजगार और आत्मनिर्भरता की ओर कदम’
मुनिता स्व-सहायता समूह के लिए मछली पालन केवल आय अर्जित करने की गतिविधि नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। संस्थागत ऋण का उपयोग उत्पादन आधारित गतिविधि में किया जा रहा है, जिससे महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार का अवसर भी मिल रहा है।
निरा राजवाड़े ने बताया कि समूह की महिलाएं मेहनत और सामूहिक प्रयास के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उनका लक्ष्य मछली पालन को और विस्तार देना तथा भविष्य में समूह की महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे ले जाना है।
’विष्णु भैया के प्रति जताया आभार’
निरा राजवाड़े ने ‘बिहान’ के माध्यम से समूह को मिले सहयोग के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद महिलाओं को संगठित होकर कार्य करने, ऋण प्राप्त करने और अपनी आजीविका गतिविधि शुरू करने का अवसर मिला है।
उन्होंने कहा कि मछली पालन से आने वाले समय में समूह की आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। आर्थिक गतिविधि से जुड़ने के बाद महिलाओं की परिवार में आर्थिक भूमिका भी मजबूत हुई है और उनमें आत्मनिर्भर बनने का विश्वास बढ़ा है।
मुनिता स्व-सहायता समूह की यह पहल ग्रामीण महिलाओं के सामूहिक प्रयास, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और संस्थागत सहयोग से आजीविका के नए अवसर सृजित करने का उदाहरण है। ‘बिहान’ से मिले आर्थिक संबल के सहारे महिलाएं अब अपने श्रम और सामूहिक प्रयास से आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं और अपने परिवार के बेहतर भविष्य की मजबूत नींव तैयार कर रही हैं।




