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ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति से शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार

शिक्षकविहीन विद्यालयों को मिला संबल, बच्चों की उपस्थिति में भी आई बढ़ोत्तरी

शिक्षकविहीन विद्यालयों को मिला संबल, बच्चों की उपस्थिति में भी आई बढ़ोत्तरी

राज्य शासन की युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के सकारात्मक प्रभाव अब सुदूर ग्रामीण अंचलों में भी स्पष्ट रूप से नजर आने लगे हैं। सुकमा विकासखंड के शासकीय विद्यालयों में शिक्षकों की पदस्थापना से जहां शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आया है, वहीं विद्यार्थियों की उपस्थिति भी बढ़ी है।

विकासखंड शिक्षा अधिकारी  सुखराम देवांगन ने जानकारी दी कि सुकमा में कुल 246 शासकीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं, जिनमें 181 प्राथमिक, 65 माध्यमिक, 13 हाई स्कूल और 7 हायर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं। युक्तियुक्तकरण से पूर्व 1 विद्यालय पूर्णतः शिक्षकविहीन था जबकि 42 विद्यालय एकल शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे थे। शासन द्वारा की गई पारदर्शी युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के चलते इन विद्यालयों में शिक्षकों की नियमित पदस्थापना सुनिश्चित हुई है।

सुकमा कलेक्टर  देवेश धु्रव ने बताया कि अब विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या संतुलित हो गई है, जिससे विद्यार्थियों को सभी विषयों की नियमित शिक्षा और मार्गदर्शन मिल रहा है। इसका प्रत्यक्ष लाभ छात्रों की उपस्थिति और प्रदर्शन में देखने को मिल रहा है।

विद्यालय प्रबंधन समिति ने इस पहल को ग्रामीण व पिछड़े क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया है। समिति का कहना है कि अब छात्र नियमित रूप से कक्षाओं में भाग ले रहे हैं और उन्हें निजी ट्यूशन या बाहरी मदद की जरूरत नहीं पड़ रही है। इससे ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिली है और शिक्षण व्यवस्था में नया विश्वास पैदा हुआ है।

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