एक सच्चा कोरोना वारियर जऊन सबला बीमारी ले बचाय बर निभावत हे अपन कर्तव्य

एक सच्चा कोरोना वारियर जऊन सबला बीमारी ले बचाय बर निभावत हे अपन कर्तव्य
.कमलज्योति/ विष्णु वर्मा, सहायक जनसंपर्क अधिकारी

दुनिया वाले मन के नजर म ये काम बहुत छोटकन हे, फेर ये छोट कन काम ल कोनो अपनाना नइ चाहए। सबो ये काम ले दूरिहा भागना चाहथे। कोनो-कोनो जे मन एला अपनाए हें, ये उंखर मजबूरी ये, पेट पाले के, परिवार पाले के। वइसे तो कोनो काम छोटे या बड़े नइ होवय, फेर ये कलजुग ये। इहां हर काम के कीमत होथे, अऊ जिहां कीमत होथे, उहें वो काम या चीज के फरक छोटे या बड़े म आंके जाथे। ये काम घलोक अपन कीमत के सेती छोटे हे। द्वापर जुग म एक कन्हैया रहिस जऊन बंसरी बजात रहिस, दुखिया मन के दुख-दरद दूर कर देत रहिस। अब कलयुग ये अऊ इहां मनखे के रुप म कइ झन कन्हैया हें। अइसनहे एक कन्हैया हे जऊन बंसरी त नइ बजावय, फेर ओखर सीटी रोज बाजथे। उहू सैकड़ों मनखे के दुख-दरद दूर करथे। दरअसल ये कन्हैया एक सफाईकर्मी ये अऊ रोज मनखे मन के घर के कचरा उठाके सबला बीमार होए ले बचाथे। वो ह बचपन ले ही ठीक से बोल नइ सकय, ठीक ले चल नइ सकय, ये कन्हैया अपन मेहनत अऊ स्वाभिमान के बलबूता म बहुत मनखे मन बर प्रेरणा अऊ आदर्श तको बन सकत हे, जेमन शारीरिक रूप ले सही सलामत हें।
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सफाईकर्मी कन्हैया के भागदौड़ के शुरुआत सूरुज निकले के पहिलीच शुरु हो जाथे। अपन रिक्शा लेके गली-मुहल्ला म घुसतेच गर म ओरमाए सीटी मुंह म आ जाथे। जोर-जोर से सांस भरत वो अइसन सीटी बजाथे, के पारा-मुहल्‍ला के घर के मनखे सावचेत हो जाथें। ये बेरा म चाहे कतको बड़का काम काबर न होवय? कन्हैया के सीटी के आगू सब काम छोटकन हो जाथे। सब काम छोंड के मनखे मन घर के दरवाजा खोलथें अऊ कन्हैया के रिक्शा म अपन घर के मुसीबत ल कचरा के रूप म वोकर रिक्‍शा म डार देथें। घर म सकलाए कचरा के मतलब तो उही घर वाला जानथे जे ह अपन घर ल साफ-सुथरा रखना चाहथे। एक दिन के भीतरेच जमा होए कचरा म खान-पान के अपशिष्ट के अलावा न जाने अऊ कतका अपशिष्ट अऊ अनुपयोगी समान होथे जे ह समय के संग घर म परेशानी के सबब बन जाथे। कन्हैया रोज सबके घर ले गीला अऊ सूखा कचरा उठाके मनखे मन के परेशानी ल दूर कर देथे। ये बीच घर म मौजूद गंदगी कन्हैया के रिक्शा म चल देथे अउ स्‍वच्‍छता के संग घर म खुशी के एक लहर छा जाथे।
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कन्हैया रोजेच रिक्शा ले घूम-घूम के टाटीबंद ले लगे कबीर नगर के करीबन 200 घर मन के कचरा उठाथे। भिनसरहा 7 बजे ले मंझनिया 2 बजे तक वो ह अपन डयूटी म पूरा ईमानदारी अपनाथे। लड़खड़ात जुबान अऊ चाल ओखर जिंदगी के हिस्सा ये। हो सकत हे ये कोनो बीमारी होही। कोरोना संक्रमण के दौर म बखूबी अपन दायित्व मन ल निभात कन्हैया ह कोरोना के डर ले कभू खुद ल कचरा उठाए के काम ले अलग नइ करिस। ओखर शारीरिक परेशानी घलोक कभू आड़े नइ आईस। वो कहिथे घलोक के बचपन ले ही मेहनत करइया ल भला रिक्शा खींचे म का परेशानी आही?
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खैर कन्हैया तो कलयुग के कन्हैया ये। बचपन ले ही वोकर पिता के साया उठ जाय के बाद सिरिफ 14 साल के उमर ले ही दुख के बीच वो ह जीना सीखे हे। आज वो 28 साल के हे अऊ घर-घर जाके रिक्शा खींचत, कचरा उठात वोजा 5 साल हो गे हे। वो कहिथे के कोनो मनखे कोनो के संग नइ देवय। अपन मेहनत अऊ स्वाभिमानेच ह सब कुछ ये। पिताजी के रहत ओ हर पांचवीं तक पढ़ाई करिस, फेर वोखर मौत के बाद ओला मजबूरन काम करना परिस। घर म ओखर माता हे, जऊन मजदूरी करथे। एक छोटे भाई अऊ बहिनी घलोक हे जऊन घर म रहिथे।
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कन्हैया के बताती कोरोना संक्रमण के पहिली सीटी के अवाज सुनके मनखे मन घर के बाहिर आत रहिन, कचरा रिक्शा म डाले के संग कुछ गोठ-बात घलोक कर लेत रहिन। फेर अब अइसन नइ ये। सीटी बजाय के बाद मनखे सावचेत त हो जाथे फेर कचरा ल दूरिहा ले ही फेंकत बिना कुछ बोले चुपचाप घर म घुसर जाथें। कन्हैया बताथे के अधिकांश मनखे कोरोना संक्रमण के डर ले वोखर ले बात नइ करना चाहत होही, एकरे सेती उहू चुपचाप अपन काम करत निकल जाथे। रोजेच अपन घर के कचरा कन्हैया के रिक्शा म डरइया श्रीमती वीणा देवी कहिथे के कोरोना महामारी जइसे संकटकाल म कोनो अनजान त दूर अपन चीन-पहिचान ले हाथ मिलाए म परहेज करइया मनखे कन्हैया जइसे सफाईकर्मी के परवाह शायदेच करत होहीं। कम पगार म अपन परिवार के खरचा उठाके एक जिम्मेदार नागरिक के परिचय देवइया कन्हैया बहुत झन के समस्या मन ल भले पइसा कमाए के खातिर दूर करे हे फेर ये तको सत ये के काकरो घर के गंदगी ल साफ करना अऊ ओ मन ल राहत देना कोनो आसान काम घलोक नइ हे। हम ये कलयुग म लापरवाही के किस्सा बहुत देखथन। मनखे जिम्मेदार पद म होत घलोक अपन जिम्मेदारी के निर्वहन नइ करयं। अइसन म कन्हैया वो कोरोना वारियर ये जऊन ह, सबके मुसीबत ल दूर करत हे। हमला घलोक चाही के समाज म एक अलगेच भावना ले देखे के जगा कन्हैया जइसे सफाईकर्मी मन के रिक्शा म कचरा डारत बेरा उंखर से दूरिहा ले ही सहीं, कुछ घरी बात करके उंकर सुख-दुख जान तो लन, ताकि हमर घर साफ-सुथरा रहय अऊ कोनो बीमारी झन फइलय। इंकर मन संग दू बानी मीठ बोले ले इंकरो हिम्‍मत बाढ़ही अउ हम करोना जइसे महामारी ले लड़े के हिम्‍मत जुटा पाबोन

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