नवा सरकार म का छत्तीसगढ़ के मूल संस्कृति अपन मूल अस्तित्व म लहुटही…?

नवा सरकार म का छत्तीसगढ़ के मूल संस्कृति अपन मूल अस्तित्व म लहुटही…?

36गढ के मूल संस्कृति इहां के मेला-मड़ई की संस्कृति आए। इहां के लोक पर्व मातर के दिन मड़र्ई जागरण के संगे-संग इहां मड़ई-मेला के शुरूआत हो जथे जेन ह महाशिव रात्रि तक चलथे।

मड़ई के आयोजन जिहां छोटे गांव-कस्बा अऊ गांव म भरईया बाजार म आयोजित करे जाथे उंहें मेला के आयोजन कोनों पवित्र नदी नहीं ते सिद्ध शिव स्थल म होथे। ऐ परंपरा ह सदियों ले चले आत हे। इही कड़ी म पवित्र त्रिवेणी संगम राजिम के प्रसिद्ध मेला हरे जेखर आयोजन कुलेश्वर महादेव के नाव ले होत आथे।

नानकून पन म हमन आकाशवाणी के माध्यम ले गीत सुनत रेहेन – “चलना संगी राजिम के मेला जाबो, कुलेसर महादेव के दरस कर आबो।” फेर अभी कुछ वर्ष ले ऐ मेला ह काल्पनिक कुंभ के नाव धारण कर ले हे। अऊ ऐला “कुलेश्वर महादेव” के स्थान म “राजीव लोचन” के नाव म भरईया कुंभ के रूप म प्रचारित करे गिस।

जिहां तक ऐ मेला ल भव्यता प्रदान करे के बात हे त ऐखर स्वागत करना हमर दायित्व हे। फेर ऐखर नाव ल बदल के दूसर नाव करना कोनों सूरत म स्वीकार नई करे जा सके। छत्तीसगढ ह बूढादेव के रूप म शिव संस्कृति के उपासक रेहे हे। तब कोनों दूसर देव के नाव म भरईया कुंभ मेला ल कईसे स्वीकार करे जा सकत हे।

कतेक आश्चर्य के बात हरे कि इहां के तथाकथित बुद्धिजीवी अऊ जनप्रतिनिधि मन ऐ मामला म कोनों टिकी टिप्पणी करत नई दिखे। जबकि ऐ आयोजन म होवईया कार्यक्रम म अपन भागीदारी बर लुलवात हे।

सबले आश्चर्य के बात त ऐ हरे कि इहां के तथाकथित संस्कृति अऊ इतिहास के जानकार मन ल घलो समझ नई आत हे कि महाशिव रात्रि म भरईया मेला महादेव के नाव ले भरे जाथे।

संगवारी हो, जेन समाज के बुद्धिजीवी अऊ मुखिया काखरो बर अंधभक्त हो जाथे, ओ समाज ल गुलामी भोगे बर कोनों नई बचा सके। आज हमर छत्तीसगढ ह अपने जमीन म अपन अस्मिता के स्वतंत्र पहचान बर तड़पत हे। ऐखर कारण इही अंधभक्त मन हे। शायद छत्तीसगढ़ देश के एकमात्र राज्य हरे जिहां के मूल निवासी मन के भाषा, संस्कृति अऊ लोगन म हासिए म आ गे हे। बाहिर ले अवईया राष्ट्रीयता के ढोंग करईया मन जम्मो महत्वपूर्ण ओहदा म काबिज हो गे हे।

इहां बताए के बात हे कि ए देश म जेन चार जगह म वास्तविक कुंभ आयोजित होथे वहू ह शिव स्थल के नाव ले जाने जाथे अऊ पहचाने जाथे। तब ए काल्पनिक कुंभ ल काबर कुलेश्वर महादेव के नाम ले नई पहचाने जाना चाहिए..?

अब नवा सरकार के समय आ गे, तब विश्वास होत हे कि पूर्ववर्ती सरकार के 15 साल म इहां के संस्कृति, इतिहास अऊ गौरव संग जेन खिलवाड़ करे गे रिहिस अऊ लोगन ल भ्रमित कर एला समाप्त करे के खेल खेले गे रिहिस ऐमा अब रोक लगही। अऊ इहां के संस्कृति अपन मूल रूप म संरक्षित अऊ विकसित होही।

लेखक आदि धर्म जागृति संस्थान के संस्थापक ए..

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