छत्तीसगढ़ी कथा -डॉ सत्यभामा आडिल

छत्तीसगढ़ी कथा -डॉ सत्यभामा आडिल

अपन-अपन भाग

मेटावरहिन सहर मं बसगे । घरवाला पटवारी रहिस । रिटायर होईस तव गांव के खेतीखार ल बेचके सहर तीर मं चार एकड़ खेरा खरीदिस अऊ बड़े पक्का मकान सहर के बीच मं बनईस । चार कुरिया नीचे,चार कुरिया ऊपर । नीचे ऊपर बाथरूम,लेट्रिन,अंगना छत। बीचो बीच सीढ़िया । ऊपर दू झन किरायादार। तीन बेटा अऊ एक बेटी संग पटवारी अऊ मेटावरहिन नीचे रहांय। छोटे बेटा दूसर मं डाक्टरी पढ़त रहय । दू बेटा के विहाव करिस, तीसर बेटा के आंख लड़िस,सामने घर के लड़की संग,अऊ उढ़रिया भाग गे। ओला लेके पटवारी मूंड़ धर के बईठगे । पटवारी पईसा के मनखे ए। अपन कमईस,फेर लईका मन के मकई ल धरथें। एक झन भाग गे, त दू बेटा बहू,घर मं ,बहू मन के हाथ मं पईसा नई रहय। बड़े बहु के तीन बेटा,दूसर बहू के लईका नई होए रहय, चार बछर होेगे बिहाव होय। ‘‘लईका नई होवय ठगड़ी के ‘‘ -अइसने गारी दय ससुर ह । बात – बात मं ‘‘घर ले निकल जा‘‘ कहाय । बेटा कमती बोलईया । एक दिन सिरतोन मं बेटा ह बहू संग रेंग दिस । बड़े बेटा के तबादला दूसर सहर मं होगें। ऊहू इ लईका मन संग रेंग दिस। पटवारी अऊ मेटावरहिन अकेल्ला होगें । ऊहू ह लईका मन संग रेंग दिस । बड़े बेटा के तबादला दूसर सहर मं होगे। एक बछर बीतीस तहाॅं ले बड़े बेटा के दू झन बेटा ल ले अईन। कोरा मं खेलत तीसर बेटा ल बहू करा छोड़दिन। एक दिन अईसन होईस कि बड़े बहू ह कोरा के लईका ल छोड़ के दूसर संग उढ़रिया भाग गे। बेटा ह लईका ल मां बाप करा छोड़िस अऊ घर जा के फांसी लगालिस। बहू के चालचलन पहिलीच ले बने नई रिहिस।
दूसर बहू ह छोटे लईका ल ‘‘गोद लेंहू‘‘ कहिके मांगिस । ससुर ह ओला ‘‘ठगड़ी ‘‘ कहिके फेर गारी दिस । लईका ल नई दिस।
पटवारी के डाक्टर बेटा अऊ बेटी के बिहाव होईस। दूसर बेटा बहू ल नई नेंवनिस।‘‘ठगड़ी के नजर झन लागय‘‘-कहिके पटवारी ह सबो परिवार वाले मन ल चेता दिस। डाक्टर ह बिहाव करके चल दिस। बेटी चलो नौकरिहा पति संग चल दिस।
ये बिहाव के बछर भर बाद,दूसर बहू के पांव भारी होगे। ‘‘ठगड़ी के बेटा होगे ‘‘रऊतईन करा सुनके घलो पटवारी ह देखेबर नई गिस। हां,मेटावरहिन ल लुकाके कपड़ा लत्ता लेके , देखेबर गिस। रऊतईन संग बहू बेटा के घर गिस। ओखर बनाये घर दुवार अऊ अपन नवा बंस ले देखके खुसी मं रो डारिस। सेंकिस-चुपरिस अऊ बहू ल घलो मया करके लुगरा,काजु,किसमिस, बदाम दिस खाय बर। बेटा ह महतारी बर नवा लुगरा लानिस। दू घंटा सरग नहीं बीतिस। मेटावरहिन पटवारी के डर मं चल दिस आंसू पोंछत,असीस देवत। मां के असीस घर मं फलिस फूलिस। बेटा कालेज में पढ़ावत रहिस। भर संास लेके,असीस देके लहुटत महतारी ल जी भर के देखिस।
दूसर दिन ओ घर के रऊतईन,दऊड़त बताय बर अईस – मां के धड़कन खतम होगे। पटवारी ह चिल्लावत हे ‘‘ठगड़ी ठगड़ा ल कोनों झन बलाहु, ऊंखर मुंह नई देखंव, हमर बडे़ नाती हे आगी देहीं- डाक्टर घलो नई आही त ? ‘‘का किबे,चुपचाप बताय बर आए हंव अपन होके ।
नई गिन बेटा बहु मन। बहू के मन पानी देस के होईस , फरे दसगात्र अऊ तेरही घलो मं चिल्ला-चिल्ला के कहाय–‘‘निरबंसी मन के छांव नई देखंव,घर के हिस्सा नई देवंय। अऊ दसगात्र मं पगबंधी के बेरा-अपन पगबंधी करईस । बड़े बेटा के तीनों लईका मन ला बेटा के मरे के मिले पईसा नई दिस। बड़े नाती के अनुकंपा नियुक्ति होगे रहसि। पईसा ल पोटारे बुढवा,अकड़बाज पटवारी तीन महिना पाछू खतम होगे। डाक्टर अईस,भाई ल खबर भेजिस–‘‘आगी देही‘‘ नई गिस भाई ह । ‘‘पगबंधी करहीं‘‘, नई गिस भाई ह । ओ घर ले रिस्ता टोरिच् , त टोरी दिस। बाप ल न आगी दिस, न बंटवारा लिस। दूसर भाई ह जबर के जिद ठाने रिहिस। बेटा ह पांचवी मं रिहिस- एक दिन मोटर एक्सीडेंट मं दूसर भाई खतम होगे। डाक्टर अईस । सब काम करिस खुद होके। भऊजी ल कहिस-‘‘मंय ओ घर के बंटवारा दुहं-ऊहें दू कुरयिा मं रहव। ये मकान ल किराया में दे दव। जादा किराया आही।खरचाा चल जही।‘‘ फेर भऊजी नई मानिस- ‘‘तुंहर भईया,बाप के जायदाद ल नई छुंवव केहे रहिन। मंय बंटवारा नई लेवंस। ‘‘
‘‘ये कईसे हो सकथे भऊजी पैतुक संपत्ति सबके होथे। मंय कमान ल बेचवाहूं। पईसा बांटहूं अउ एक एकड़ खेत ल मोर भजीजा के नांव मं चढ़ाहूं । ‘‘डाक्टर कहिस । भऊजी ल मनईस। ‘‘तोर दस्तखत बिन ए मकान बिकय नहीं,दस्तखत करेच् ल पढ़ही । मंय झगरा के जर ल खतम करके डयूटी मं जाहूं। भऊजी मजबूर होगे। भगवान मं दीया जलईस अऊ दस्तखत करिस। फटाफट मकान बिकगे। भगवान मं दीया जलईस अऊ दस्तखत करिस। फटाफट मकान किबगे । बढ़िया बेपारी लेवाल मिलगे। एक भाग पईसा,चार लाख रू. भऊजी ल देके कहिस -‘‘ए भतीजा के भाग के पईसा ए भऊजी, ऊपर वाला के मरजी ए । एक एकड़ खेत के धान चाऊॅंर तुमन खाहू। खेत रेगहा लवईया ल मंय ह चेता देय हंव। घर आके फसल के पईसा देहीं। भऊजी ह जी भर के डाक्टर देवर ल देखिस,मानों सग भाई खडे़ हे। सग भाई ह तो कुछु नई दिस,अऊ देवर ह सब दे दिस। अपन – अपन भाग । भगवान के नियाव ऊपर बिसवास होगे।

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