अस्पी फार्मर ऑफ द ईयर अवॉर्ड (बागवानी श्रेणी) : भाबेन्द्र मोहन बोरगोहेन

अमेरिकन स्प्रिंग एंड प्रेसिंग वर्कस प्रा.लि. (अस्पी) पौध संरक्षण यंत्र के क्षेत्र म एक जाने पहिचाने प्रतिष्ठित नाम हे। अस्पी के पितृ पुरुष स्व. श्री लल्लूभाई पटेल अऊ अस्पी एक दूसर के पर्याय ये। सरल, सहज सादगी ले भरपूर स्व. श्री लल्लूभाई के जीवन के केवल एके लक्ष्य रहिस- खेती के विकास अऊ किसान मन के समृद्धि। उमन अपन सक्रिय जीवन म बहुत अकन गांव मन ल गोद लेके विकास के राह दिखईस, कई शिक्षण संस्था मन ल सरलग सहायता अऊ सहयोग दीस, कृषि अनुसंधान अउ शिक्षण के क्षेत्र म बहुत अकन संस्थान स्थापित करिन अऊ स्थापित संस्थान मन म अनुसंधान केन्द्र मन के स्‍थापना करीस। ऊंखरे कोति ले स्थापित अस्पी एग्रीकल्चरल रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन कृषि अउ कृषि यंत्रीकरण के क्षेत्र म उच्‍च शिक्षा अउ शोध ल प्रोत्साहित करथे।



अस्पी ह अपन इही सियान के सुरता म हर बछर देश के उत्कृष्ट किसान मन ल अस्पी एल.एम. पटेल अवॉर्ड ले सम्मानित करथे। येमा बागवानी, वर्षा आश्रित खेती अऊ विशेषरूप ले महिला कृषक मन ल पाछू 24 बछर ले गरिमामय समारोह म पुरस्कृत करे जात हे। पुरस्कार म अस्पी कोति ले एक लाख रुपिया के सम्मान राशि के संग ट्रॉफी अऊ प्रशस्ति पत्र देहे जाथे।




जैविक चाय उत्पादक बर अस्पी फॉर्मर के इनाम भाबेन्द्र मोहन ल
इही कड़ी म कुछ दिन पहिली मुम्बई म होए पुरस्कार समारोह म साल 2017 के पुरस्कार देहे गीस। एमा पुरस्कृत किसान मन के सफलता के कहानी कृषक जगत पतरिका म छपत हे। जकर मुताबिक बागवानी श्रेणी म चाय उत्पादक किसान आसाम के डिब्रूगढ़ जिला के सीपोन तहसील के श्री भाबेन्द्र मोहन बोरगोहेन ए साल इनाम पाइस।



इंखर बारे म बताथें के 37 बछर के भाबेन्द्र अपन स्कूल के पढ़ई पूरा करे के बाद अपन पैतृक व्यवसाय चाय बागान म जुड़ गीस। ओकर तीर 5 हेक्टेयर जमीन हे जेमां 3 हेक्टेयर म ओ ह चाय के खेती करथे अऊ बाकी 2 हेक्टेयर म धान के फसल लेथे। संगें संग 6 गाय अऊ 5 छेरी के संग कुछ कुकरी तको पोंसथे। इमन अपन खेत म जैविक तरीका ले चाय उत्पादन करथें। इमन नवोन्मेषी खेती, आधुनिक अऊ पारंपरिक तरीक के उपयोग करके चाय उत्‍पादन करथें।




भाबेन्द्र अपन चाय बागान मन म टोकलाई टी रिसर्च इंस्टीट्यूट, जोरहट आसाम कोति ले विकसित चाय के किस्म टीवी 23, 25, 26 अउ टीएस 463, 465 लगाथें। बागान मन म जल निकासी के उचित प्रबंध कीट-रोग मन ले बचाव बर इमन बायो पेस्टिसाईड्स के उपयोग अऊ अनुसंधान केन्द्र के सिफारिश मन ल पूरा अमल म लाथें।



इमन मार्च ले दिसम्बर तक चाय के तुड़ाई करथें। करीबन 40-45 राउंड कटाई के होथे अऊ एक राउंड 4-5 दिन के होथे। भाबेन्द्र अपन बागान ले प्रति हेक्टेयर 9 ले 11 टन चाय के उत्पादन लेथें। हाथ ले तोड़े, सुखाए, बीने गए चाय पत्ति मन के मूल्य सवंर्धन करके, हेंड क्राफेटेड ग्रीन टी म बदल के भाबेन्द्र मोहन बोरगोहेन ल लागत के दुगना आमदनी होथे।

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