करेला बेंच के पोठावत हें किसान : करेला के खेती के साबर मंत्र

जमीन अउ जलवायु– करेला एक पौष्टिक साग (सब्जी) ये जेकर खेती भारत भर म साल भर करे जाथे। करेला के फल ह लोहा (आयरन), चूना (कैल्सियम) अउ विटामिन ले भरपूर होथे अऊ ये मां औषधीय गुण घलोक पाए जाथे। करेला के कच्चा फल के उपयोग कई प्रकार के साग (सब्जी) बनाए म अऊ अचार बनाए बर करे जाथे। करेला उपठष्ण कटिबंधी साग (सब्जी) ये अऊ एखर खेती बर गरम अऊ सुक्‍खा जलवायु के जरूरत होथे। थोकन ठंडक अऊ जादा वर्षा वाले क्षेत्र मन म घलोक एखर खेती करे जा सकत हे। मादा फूल के बने बर, फूल मन ले फर बने बर अऊ पौधा के बढ़वार म 35 डिग्री सेल्सियस ले जादा तापमान करेला ल बिगाड़थे अऊ वायरस जनित बीमारी लगे के संभावना बाढ जाथे। कडा बीज कवच के सेती 10 डिग्री सेल्सियस ले कम तापमान ह बीज भरे म घलव गलत प्रभाव डारथे। करेला के खेती कई प्रकार के जमीन म करे जा सकत हे फेर उपजाऊ बलुई दोमट अऊ दोमट जमीन जेखर पी.एच.मान 65-7.00 होवय, एखर खेती बर सबले बढ़िया माने गए हे। क्षारीय जमीन जेखर पी.एच.मान 8 तक होवय वोमा घलोक एखर खेती करे जा सकत हे।




खेत के तैयारी – करेला के खेती म बीज के उचित जमाव बर मिट्टी के भुरभुरा होना जरूरी हे। 2-3 जोताई उलट करव अऊ पाटा चलाके खेत तैयार करव। खेत के तैयारी के बेरा म ही गोबर के 15-20 टन खाद खेत म बगरा के मिट्टी म बने सहिन मिला लव अऊ खेत म 2-2.5 मीटर चौडा क्यारी बना लव। क्यारी मन म 60 सेंटीमीटर घेरा के 30-40 सेंटीमीटर गहिर गडढा खोद लव। पौधा मन ल ऊपर चढाए बर दू क्यारी मन के बाद 5 मीटर के दूरिहा म 3 मीटर ऊँचा बाँस या लोहा के खंभा गाड दव।




बीज अउ बीजाई – करेला के प्रमुख प्रजाति हे: अर्का हरित, इन्डाम ग्रीन लाँग, इन्डाम सफेद लोग, कल्यानपुर बारामासी, प्रिया, पूसा दो मौसमी, पूसा विशेष, शक्ति, शुभद्रा अउ साबिभी। करेला के संकर प्रजाति मन म अमरतारा, इन्डाम 1124 काशी उर्वशी, कोहिनूर, एन.एस. 1018, एन.एस. 1020, एन.एस. 1024, एन.एस. 434 एवं एन.एच. 461। करेला के खेती बर बीज भरोसा वाले जगा ले लेवव। बोवाई ले पहिली बीज ल 12 घंटा तक ठंडा पानी म भिलो लव अउ जब बीज के कवच मुलायम हो जाए तब बीज ल पानी ले निकाल के भींजे कपड़ा म बाँध के 1-2 दिन रखव जेखर से बीज अंकुरित हो जाये। पहिली ले तैयार खेत म 4-5 अंकुरित बीज बोवय। ए विधि ले एक हैक्टर खेत के बोंवाई बर 5-6 किलोग्राम बीज के जरूरत परथे। कहूं खेत म बहुत नमी होही त जमीन ले ऊँचा उठे क्यारि मन म 25 मीटर के दूरी म बने कतार म 1 मीटर के दूरी म जमीन म छेद बनाके हरेक जगा म 4-5 बीज के बोंवाई करव। बीज जमीन म 2 सेंटीमीटर के गहरई म बोंवव। बीज बोवाई ले पहिली बीज ल ट्रायकोडरमा विरिडी 4 ग्राम या स्यूडोमोनास फ्लूरोसेन्स 10 ग्राम या 10 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज के दर ले उपचारित तको करव। करेला के बुवाई के सबले बढ़िया समय जनवरी-फरवरी अउ जुलाई के महीना माने गए हे। बोंवाई के 15 दिन बाद हर एक जगा म 2 पौधा छोडव।




पोषक तत्व प्रबंधन – खेत के तैयारी बर जोंताई के बेराच म 15- 20 टन बने सहिन तैयार करे गए कंपोस्ट खाद ल खेत म बगरा के कर जोताई करना चाही। करेला के अच्छा पैदावार लेहे बर 100 किलोग्राम नाइट्रोजन (167किलोग्राम यूरिया), 60 किलोग्राम फास्फोरस (130 किलोग्राम डाई अमोनियम फास्फेट) अऊ 60 किलोग्राम पोटाश (100 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश) प्रति हैक्टर के सिफारिश करे जाथे। नाइट्रोजन उर्वरक के एक तिहाई मात्रा, फास्फोरस उर्वरक के पूरा मात्रा अऊ पोटाश उर्वरक के आधा मात्रा बोंवाई के तुरते, पहिली खेत म बगरा के जोंताई के संग मिट्टी म मिलावंय। पोटाश उर्वरक के बांचे आधा मात्रा बोंवाई के 45 दिन बाद डालना चाही अऊ नाइट्रोजन उर्वरक के दू तिहाई बचे मात्रा बोवाई के बाद 15 दिन के अंतर म 5-6 पइत डारना चाही। उर्वरक डारते बेरा खेत म बनेच नमी के होना जरूरी हे। उर्वरक पौधा के पाना, डारा अउ जर के सीधा संपर्क म नइ आना चाही।




सिंचाई – करेला के फसल ह सुक्‍खा या जादा ओद्दा धरती ल सहि नइ सकय। बोंवाई के तुरते सिंचाई करना चाही। एखर दू दिन बाद फेर हल्का सिंचाई करव अऊ बाद म जरूरत के मुताबिक हर हफ्ता म हल्का सिंचाई करव। खेत के ऊपर ले 50 सेंटीमीटर के गहराई तक हमेसा बने नमी के बने रहना करेला ले बने उपज लेहे बर जरूरी हे। करेला के लता ल फैले बर जमीन ले 1.2 ले 1.8 मीटर ऊँचा मचान बनाना चाही। एखर व्यवस्था ले फल के जादा उपज, उचित आकार, फल के सडन ले सुरक्षा, फल तोडे म आसानी, दवा के छिडकाव म सुविधा अऊ फल के तोड़ाई करे म घलोक सुविधा होथे।




खरपतवार नियंत्रण -करेला के खेत ले खरपतवार मन ल निकालत रहना चाही। समय म निराई, उथला गुड़ाई अऊ पौधा मन म मिट्टी चढाना पौधा के बढवार अऊ बने उपज लेहे बर जरूरी हे। करेला के खेत म 2-3 पइत खरपतवार मन के खुरपी ले निराई खच्चित करव। पहली निराई बोंवाई के 30 दिन बाद करव। जमाव ले पहिली खरपतवारनाशी ब्यूटाक्लोर के 2 किलोग्राम सक्रिय तत्व 500-600 लीटर पानी म घोल बनाके छिडकाव करे ले फसल के सुरू के अवस्था म खरपतवार मन म नियंत्रण रखे जा सकत हे। पौधा मन के विकास ल प्रभावित करइया रसायन एम.एच. 50-150 पी.पी.एम या सी.सी.सी 50-100 पी.पी.एम या इथ्रेल 150 पी.पी.एम या सिल्वर नाइड्ररेट 3-4 पी.पी.एम या बोरान 3-4 पी.पी.एम ल पानी म घोल बनाके पौधा मन के 2 पत्ती या 4 पत्ती के अवस्था म छिंचे ले मादा फूल मन के संख्या अऊ उपज म मनमाफिक प्रभाव देखे गए हे।




मूल स्‍त्रोत : इफको किसान, अनुवाद  कापीराईट : ३६गढ़ी डॉट कॉम

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