का साग खाए गोई .. ‘गुच्छी’ जेकर हे सोन के भाव

मंहगी के ये जमाना म सबो साग-भाजी अब बड़ मंहगी हो गए हे। बजार म अब कोनो साग पचास रूपिया किलो ले कम नइ हे। अभी बजार म सबले मंहगी बोहार भाजी आवत हे जेन ह अंदाजी डेढ़ सौ रूपिया किलो चलत हे। येती अभी के समें म बोहार भाजी ले मंहगी साग-भाजी नइ ये। हम अतकेच भर ल सुने रहेन फेर कोनो साग सोन के बरोबर महंगी होही ये बात हम सोंचे घलव नइ रहेन। सियान मन मेर पूछे अउ इंटरनेट म खोजे ले पता चलिस कि ये सिरतोन बात ये, अउ ये दूसर देस के बात नोहे इही देस के बात ये।



त हम आप मन ल बता देवन के ये साग के नाव ‘गुच्छी’ हे, लोगन मन के कहिती येकर दाम 25-30 हजार रूपिया किलो तक हे। ये घलोक कहे जाथे के ये दुनिया के सबले महंगी साग ये। ये गुच्छी ह 2-7 सेंमी. चउड़ा अउ 2-10 सेंमी. लंम्‍भा होथे। ये ह पहाड़ी इलाका मन म उगाए जाथे, एकर वैज्ञानिक नाम ‘मार्कुला एस्क्यूलेंटा’ हे। गुच्छी के पैदावार हिमाचल प्रदेश, कश्मीर अऊ हिमालय के पहाड़ मन म होथे। विटामिन बी अऊ डी के संगें-संग गुच्छी म विटामिन सी अऊ विटामिन के घलोक प्रचुर मात्रा म पाए जाथे। आयुर्वेद के मुताबिक एखर सरलग सेवन करे ले दिल के बीमारी नइ होवय। भारत ले विदेस म येकर निर्यात घलोक बड़ मात्रा म करे जात हे।



गुच्छी एक प्रकार के प्राकृतिक मशरूम ये जेखर तना पंडरा अउ हल्का पिंवरा रंग के होथे। ये भितरी ले फोसवा होथे। एकर ऊपर कोति के भाग हल्का भूरवा पंडरा होथे। ये क्षारीय मिट्टी ले लेके अम्लीय मिट्टी म तको उगथे। गुच्छी ल बसंत ऋतु के शुरू म जंगल, बाग-बगैचा, अंगना अउ हाले आगी लगे बन-कचरा वाले धरती म पाए जाथे। हम आप मन ल बता देव के एखर खेती नइ करे जाए भलुक ये ह अपने आप उबजथे। एला पहाड़ मन म गिंजरईया साधु-संत अउ पहाड़ी गांव वाले मन सकेलथें। एला हिंदी भाषी राज्य म स्पंज मशरूम के नाम ले घलोक जाने जाथे। कृषि बैग्‍यानिक मन एकर व्यावसायिक खेती करे बर, तापमान नियंत्रित जघा म उबजाए बर सन् 1982 म उदीम करे गए रहिस फेर ये मां सफलता नइ मिलीस।



येकर दवई के रूप म अउ साग के रूप म, दूनों बर उपयोग होथे। बड़े-बड़े कंपनी अऊ होटल मन एला हाथों-हाथ बिसाथें। गुच्छी के मांग सिरिफ भारते भर म नही भलुक पाकिस्तान, अमरीका, यूरोप, फ्रांस, इटली अऊ स्विट्जरलैंड जइसे देश मन म कुल्लू के गुच्छी के बिक्‍कट मांग हे।


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