सदाबहार के खेती हे लाभकारी, डारा-पाना अउ बीजा जम्‍मो बेंचाथे

सदाबहार (सदासोहागी) के खेती ले घलव अच्‍छा कमई करे जा सकथे। येकर खेती के बारे म हम आप ल जरूरी जानकारी इहां देवत हवन। सदाबहार के खेती बर हल्का दोमट ले रेतीली जमीन जेमां पानी के निकास अच्छा होवय बने होथे। छत्‍तीसगढ़ के वातावरन एकर बर बने हे। येकर व्‍यावसायिक तौर म खेती करे बर खेत तियार करत बेरा 50-60 क्विंटल गोबर खाद अउ 100 किलोग्राम सुपरफास्फेट अउ 50 किलो नीम के खली मिट्टी म मिलाना चाही। येकर पौधा ल नर्समी म अप्रैल-मई म तियार करना चाही। खेत म लगाए बर प्रति एकड़ 200 ग्राम बीज के जरूरत होथे। बीज ल 15-16 घंटे पानी म बोरे के बाद ओला दू किलो रेती (बालू) म मिलाके बोवाई करना चाही। अइसे करे ले पौधा समान रूप ले उबजथे।



अइसे  ढ़ग लेे तियार पौधा मन ल जुलाई म खेत म रोपाई करना चाही। एकर एक लाइन ले दूसर लाइन के दूरी 45 से.मी. अउ पौधा ले पौधा के दूरी 30 से.मी. रखना चाही। ए मुताबिक एक एकड़ म करीबन 31200 पौधा आथे। पौधा के बाढ़े उप्‍पर ले पहिली जुन्ना पाना के तोड़ाई 6 महिना बाद करना चाही। ओकर पाछू तीन महिना के बाद तुड़ाई करते रहना चाही। पाना मन ल छइंहा म पक्का फर्श म सुखाना चाही।



येकर जड़ मन ल बोवाई के 9 ले12 महिना बाद निकालथें। जड़ मन ल बने सहिन सुखाना चाही। ए अवस्था म पौधा म एल्केलाइड्स के मात्रा जादा मिलथे। एखर जड़, पाना अउ बीज ल बेंच के लाभ लेहे जा सकत हे। सदाबहार के खेती के बारे म पूरा जानकारी बर इंदिरा गांधी कृषि विश्‍वविद्यालय रायपुर के वैग्‍यानिक मन ले सलाह लेहे जा सकत हे अउ सदाबहार के सहीं बीजा के बारे म जानकारी लेहे जा सकत हे।



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