सदाबहार के खेती हे लाभकारी, डारा-पाना अउ बीजा जम्‍मो बेंचाथे

सदाबहार (सदासोहागी) के खेती ले घलव अच्‍छा कमई करे जा सकथे। येकर खेती के बारे म हम आप ल जरूरी जानकारी इहां देवत हवन। सदाबहार के खेती बर हल्का दोमट ले रेतीली जमीन जेमां पानी के निकास अच्छा होवय बने होथे। छत्‍तीसगढ़ के वातावरन एकर बर बने हे। येकर व्‍यावसायिक तौर म खेती करे बर खेत तियार करत बेरा 50-60 क्विंटल गोबर खाद अउ 100 किलोग्राम सुपरफास्फेट अउ 50 किलो नीम के खली मिट्टी म मिलाना चाही। येकर पौधा ल नर्समी म अप्रैल-मई म तियार करना चाही। खेत म लगाए…

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का साग खाए गोई .. ‘गुच्छी’ जेकर हे सोन के भाव

मंहगी के ये जमाना म सबो साग-भाजी अब बड़ मंहगी हो गए हे। बजार म अब कोनो साग पचास रूपिया किलो ले कम नइ हे। अभी बजार म सबले मंहगी बोहार भाजी आवत हे जेन ह अंदाजी डेढ़ सौ रूपिया किलो चलत हे। येती अभी के समें म बोहार भाजी ले मंहगी साग-भाजी नइ ये। हम अतकेच भर ल सुने रहेन फेर कोनो साग सोन के बरोबर महंगी होही ये बात हम सोंचे घलव नइ रहेन। सियान मन मेर पूछे अउ इंटरनेट म खोजे ले पता चलिस कि ये सिरतोन…

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किसान मन ल लखपति बनावत हे बीही के ये नवा किसम VNR BIHI

आजकल मनखे के मूड़ी जतका बड़का बिही ह बजार म अड़बड़ अंदोहल मचाये हे। एक बीही के वजन डेढ़ किलो तक पहुंचत हे अऊ एखर पैदावार करइया किसान मन के माल मंडी म हाथोंहाथ बेंचा जात हे। ये बड़का बिही न सिरिफ देखे म सुंदर लागथे भलुक एकर सुवाद घलोक बढि़या हे। बिही के ए किसिम के नाम हे VNR BIHI हे जऊन ह कई किसान मन ल मालामाल कर देहे हे। ये ह जउन इलाका मन पैदा होवत हे उहां एखर बड़ मांग हे। एखर कीमत 150 रुपिया ले लेके…

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सिंदूरी लाल पलाश

इफको किसान, जऊन ल टेसू, परसा, ढाक जइसे कई ठन नांव मन ले जाने जाथे। पलाश के फूल कुछ-कुछ मिट्ठू (तोता) के चोंच जइसन घलोक लगथे तेखर सेती एला किंशुक घलोक कहिथें। ये उत्तर प्रदेश के राजकीय फूल ये, येला भारतीय डाक टिकट म घलोक स्थान दे गए हे। पलाश के फूल मन के परयोग हर्बल रंग बनाए बर जादा करे जाथे। पलाश के फूल के अलावा एखर पत्ता, टहनी, फल अऊ जड़ के घलोक आयुर्वेदिक महत्व हे। एखर फल्‍ली मन कृमिनाशक के काम करथे। एखर फूल ले बने रंग…

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