करेला बेंच के पोठावत हें किसान : करेला के खेती के साबर मंत्र

जमीन अउ जलवायु– करेला एक पौष्टिक साग (सब्जी) ये जेकर खेती भारत भर म साल भर करे जाथे। करेला के फल ह लोहा (आयरन), चूना (कैल्सियम) अउ विटामिन ले भरपूर होथे अऊ ये मां औषधीय गुण घलोक पाए जाथे। करेला के कच्चा फल के उपयोग कई प्रकार के साग (सब्जी) बनाए म अऊ अचार बनाए बर करे जाथे। करेला उपठष्ण कटिबंधी साग (सब्जी) ये अऊ एखर खेती बर गरम अऊ सुक्‍खा जलवायु के जरूरत होथे। थोकन ठंडक अऊ जादा वर्षा वाले क्षेत्र मन म घलोक एखर खेती करे जा सकत…

Read More

साग-भाजी बर हाईटेक तकनीक पॉली ग्रीन हाउस

पॉली ग्रीन हाउस या प्लास्टिक ग्रीन हाउस पॉलीथिन शीट के उपयोग करके बनाए जाथे ए सेती एला पॉली हाउस घलोक कहिथें। पॉली हाउस के फ्रेम जंगरहित लोहा के पाइप ले तैयार करे जाथे, जऊन ल 600 गैज के पॉलीथिन ले ढांक दे जाथे। एखर भीतर बिजली ले चलइया कूलर अउ हीटर लगाके तापमान नियंत्रक उपकरण ले जोड दे जाथे। पॉली हाउस म तापमान ल नियंत्रित करइया उपकरण लगा लेहे ले बहुत ऊँचा तापमान वाले क्षेत्र मन म घलोक प्रतिकूल मौसम म साग-भाजी उगाए जा सकत हे। ग्रीन हाउस के ए…

Read More

खस ( Vetiver) के खेती हे फायदेमंद

इफको किसान, किसान मन के रूझान आजकल वेटिवर (खस) के खेती कोति होवत हे। नदी तीर के जमीन अऊ असिंचित क्षेत्र म खस के खेती करे जा सकत हे। एखर खेती बर सीमैप संस्थान कोति ले परियोजना के अंर्तगत किसान मन ल छूट देहे के संगे-संग समय-समय म प्रशिक्षण घलोक देहे जाथे। खस के उपज लगभग 15 ले 25 कुंटल प्रति हैक्टेयर होथे, एखर से लगभग 18-25 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर तेल मिल सकथे। खस के जर मन ले कास्मेटिक, साबुन, सुगंधित तेल, इत्र आदि बनाये जाथे अउ सरबत आदि शीतल…

Read More

सांप के खेती करके लाखों कमावत हे इहां के मनखे, हर घर म मिल जहि डोमी अऊ अजगर

अनाज, फल अऊ साग-भाजी के खेती के बारे म त आप मन बहुत सुने होहू, फेर आज हम आप मन ल बतावत हवन सांप के खेती के बारे म। हव जी, सुने म थोकन अजीब भले लागत होही फेर ये सही बात ये। हम बता देवन के, चीन के जिसिकियाओ नाम के गांव के सैकडों मनखे मन सांप के खेती करके लाखों रुपिया कमावत हें। जानकारी के मुताबिक जिसिकियाओ नाम के ए गांव म 30 लाख ले जादा जहरीला सांप पाले जाथे। इहां के मनखे सिरिफ सांप मन ल भर…

Read More

हरदी (हल्दी) ल मिलीस जीआई प्रमाणन

इफको किसान, ओडिशा के कंधमाल के हरदी (हल्दी) ल भौगौलिक पहिचान (जीआई प्रमाणन) मिले हे। जीआई पहिचान मिले ले भविष्य म ए हरदी (हल्दी) के वैश्विक पहिचान घलोक बाढही। देश के आन क्षेत्र मन के उत्पादित हरदी (हल्दी) के मुकाबला म कंधमाल के हरदी (हल्दी) म उत्तम गुन होए के संगें-संग एकर रंग सोन जइसे सुरूख होथे। ए हरदी (हल्दी) के औषधीय उपयोग करे म एकर कोनो उल्‍टा प्रभाव नइ परय। एखर उत्पादन म कोनो कीटनाशक के परयोग घलव नइ करे ल परय।

Read More

खेत म नमी कम होये म अपने आप होये लगथे फसल मन के सिंचाई

रायपुर, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक मन कोति ले मृदा (माटी) नमी उपर आधारित स्मार्ट सेंसर सहित अपन अपन ड्रिप (टपक) सिंचाई प्रणाली विकसित करे गए हे। ए प्रणाली के तहत कम लागत वाले मृदा नमी अधारित सेंसर तकनीक विकसित करे गए हे जेखर से माटी के नमी जतका होना चाही ओतका बने रहिथे अऊ फल मन ल जादा ले जादा मृदा नमी के लाभ मिलथे। ए ड्रिप सिंचाई पद्धति म माटी म नमी के स्तर कम होए ले सिंचाई अपने आप चालू हो जाथे जेखर से फसल मन…

Read More

“सोलर ड्रायर” जेमां गरम हवा ले सूखाथे साग-भाजी

इफको किसान, भारत म किसान हर मौसम म मौसमी फसल मन के खेती करथे, फेर कई पइत फसल मन के ठीक ले देखभाल के कमी अउ भंडारण के उचित व्यवस्था नइ होए के सेती फसल मन खराब हो जाथे। किसान मन के ए समस्या के हल “बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान” ह “सोलर ड्रायर” मशीन बना के निकाले हे। एला “नेशनल मिशन ऑफ सस्टेनेबल एग्रीकल्चर” योजना के अन्तर्गत तैयार करे गए हे । सौर ऊर्जा ले चलइया ए मशीन म साग-भाजी मन ल गरम हवा ले सुखाके ओल खराब होए ले…

Read More

स्टीविया के खेती करके, किसान कर सकत हें बनेच कमई

इफको किसान, आप मन जानत हवव के “स्टीविया” आयुर्वेदिक पौधा हे। जऊन ल “मीठी तुलसी” घलोक कहे जाथे। स्टीविया पौधा के मुख्य विशेषता ये हे के एखर मीठ पत्ति मन मधुमेह (सुगर) के रोगी मन बर लाभकारी हे। अभी हाल म भारतीय बाजार म ही स्टीविया ले बने करीबन 100 ले जादा समान मौजूद हे अऊ कई बड़े कंपनी मन स्टीविया के बड़ मात्रा म खरीदारी करत हें। स्टीविया के खेती भारत म पुणे, रायपुर, बैंगलोर, हरियाणा, इंदौर, अऊ उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सा म करे जात हे। एखर खेती…

Read More

कोंहड़ा के बिना छिलका वाले बीजा के नवा किसिम

इफको किसान, अभी तक देश म कोंहड़ा के बिना छिलका वाला बीज के आयात करे जात रहिस जेखर सेती एखर कीमत जादा होत रहिस। अब पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी लुधियाना कोति ले कोंहड़ा (कद्दू) के फसल के बिना छिलका के नवा बीज पीएयू मगज कद्दू 1 तैयार करे गए हे। एखर बीज ले सीधा तेल निकाले या खाए बर परयोग करे जा सकत हे। पीएयू मगज कद्दू 1, 90 दिन म तियार होवइया किसिम ये अऊ एखर ले करीबन 27 प्रतिशत तेल मिलथे। कद्दू के ए किसिम ले एक एकड म…

Read More