धान ल रोग अउ कीरा ले बचाय बर करव ये उपाय

किसान महंगा बीज, खाद उपयोग करके धान के खेती करथें, अइसन म सही प्रबंधन नइ होए ले कीरा अऊ रोग मन ले अड़बड़ नुकसान उठाना परथे। ए खातिर सही समय ले एकर प्रबंधन करके नुकसान ले बचे जा सकत हे।
धान के फसल ल कई ठन बीमारी जइसे धान के झोंका, भूरवा धब्बा, शीथ ब्लाइट, आभासी कंड अउ जिंक के कमी आदि के समस्या प्रमुख समस्या होथे। नुकसान पहुचइया कीरा जइसे तना छेदक, गुलाबी तना छेदक, पत्ती लपेटक, धान के फूदका अऊ गंधीबग कीरा ले नुकसान पहुंचथे। येकर उपाय हम थोरे म देवत हवन-

धान के तना छेदक
ए कीरा के सूड़ी अवस्था ही ह नुकसान करथे। सबले पहिली अंडा ले निकले के बाद सूड़ी मन बीच के कली मन के पाना म छेदा करके भीतरी घुसर जाथें अऊ भीतरीच भीतर तना ल खात गांठ तक चल देथें। पौधा के बढ़वार के अवस्था म प्रकोप होए म बालीच नइ निकलय। बाली वाले अवस्था म प्रकोप होए म बाली मन सूखा के सफ़ेद हो जाथे अऊ दाना नइ बनय।
कीरा मारे बर का करयं: फसल के कटाई जमीन के सतह ले करना चाही अऊ ठूठ मन ल सकेल के जला देना चाही। जिंक सल्फेट+बुझे चूना (100 ग्राम+ 50 ग्राम) प्रति नाली के दर ले 15-20 ली. पानी म घोल बनाके छिड़काव करव। पौध रोपाई के समय पौधा के ऊपरी हिस्सा के पाना ल थोकुन काटके रोपाई करव, जेखर से अंडा खतम हो जाथे। धतूरा के पाना नीम के पाना तम्बाखू ल 20 लीटर पानी म खउला के जब वो पानी 4-5 लीटर बांच जाय त जुड़ो के 10 लीटर गौमूत्र म मिलाके छिड़काव करव।
रासायनिक विधि – तना छेदक के रोकथाम बर कार्बोफूरान तीन जी 20 किलोग्राम प्रति हेक्टर के दर ले 3-5 सेमी स्थिर पानी म या कारटाप हाइड्रोक्लोराइड चार प्रतिशत 18 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के दर ले 3-5 सेमी स्थिर पानी म घोल बनाके छिड़काव करना चाही।

धान के पत्ती लपेटक कीरा
मादा कीरा धान के पाना मन के फुनगी तीर सकलाके अंडा देथे। ए अण्डा मन ले छे-आठ दिन म सूड़ी मन बाहिर निकलथे। ये सूड़ी मन पहिली मुलायम पाना मन ल खाथें अऊ बाद म अपन लार ले रेशमी धागा बनाके पाना ल बारा ले मोड़ देथे अऊ भीतरीच भीतर खोरच के खाथे।
धान के गंधीबग
ये वयस्क लम्बा, पतला अऊ हरियर-भूरवा रंग के उड़इया कीरा होथे। ए कीरा के पहिचान कीरा ले आए बस्‍सवनी ले घलोक कर सकत हव। ए माई अऊ पिला दूधिया दाना मन ल चूहक के हानि पहुंचाथे, जेखर से दाना मन म भूरवा रंग के धब्बा बन जाथे अऊ दाना बदरा बन जाथे।
रोकथम के देसी तरीका – कहूं ये कीरा के संख्या एक या एक ले जादा हरेक पौधा दिखत हे त मालाथियान पांच प्रतिशत विष धूल के 500-600 ग्राम मात्रा प्रति नाली के दर ले छिड़काव करव। खेत के मेड़ मन म जामे कांदी-कचरा के सफाई करव काबर के इही खरपतवार मन म ये कीरा पनपत रहिथे अऊ दुग्धावस्था म फसल उपर आक्रमण करथे।
रासायनिक विधि –10 प्रतिशत पाना नुकसान होए म केल्डान 50 प्रतिशत घुलनशील धूल के दू ग्राम/ली. पानी के दर ले घोल बनाके छिड़काव करव।

भूरी चित्ती रोग
ए रोग के लक्षण पाना मन म छोटे- छोटे भूरवा रंग के धब्बा के रूप म दिखथे। जादा संक्रमण होए म ये धब्बा आपस म मिल के पाना मन ल सूखा देथे अऊ बाली मन बने सहिन बाहिर नइ निकल सकय। ए रोग के प्रकोप धान म कम उर्वरता वाले क्षेत्र मन म जादा दिखाई देथे।
एखर रोग के रोकथाम बर बुवाई ले पहिली बीज ल ट्राईसाइक्लेजोल दू ग्राम प्रति किग्रा. बीज के दर ले उपचारित करव। गभोट के अवस्था म जरुरत परे म कार्बेन्डाजिम के छिड़काव करव। रोग के लक्षण दिखाई देहे म 10-20 दिन के अंतर म या बाली निकलत समय दू बार जरूरत के मुताबिक डारव।
रासायनिक विधि – कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत घुलनशील धूल के 15-20 ग्राम मात्रा ल करीबन 15 लीटर पानी म घोल बनाके प्रति नाली के दर ले छिड़काव करव।

पर्णच्छाद अंगमारी
ए रोग के लक्षण पाना मन म दिखथे। येकर ले बांचे बर संतुलित मात्रा म नत्रजन, फास्फोरस अऊ पोटाश के परयोग करव। बीज ल थीरम 2.5 ग्राम/किग्रा. बीज के दर ले उपचारित करके बुवाई करव। जुलाई महीना म रोग के लक्षण दिखे म मैकोजेब (0.24 प्रतिशत) के छिड़काव करव।

आभासी कंड
ये एक फफूंदीजनित रोग ये। रोग के लक्षण पौधा मन म बाली के निकले के बाद स्पष्ट होथे। रोगग्रस्त दाना पीउंरा ले लेके संतरा के रंग के हो जाथे जऊन बाद म जैतूनी- करिया रंग के गोला कस हो जाथे। येकर ले बांचे बर फसल काटे के बाद अवशेष मन ल जला देवव। ये धियान राखव के खेत मन म जादा जलभराव नइ होना चाही। रोग के लक्षण दिखे म प्रोपेकोनेजोल 20 मिलीस. मात्रा ल 15-20 ली. पानी म घोल बनाके प्रति नाली के दर ले छिड़काव करव।

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