अब किसानी करही मोबाइल, गरूवा खेत म आही त मिलही अलर्ट

अब एग्रीकल्चर प्रोटेक्शन सिसटम (एपीएस) डिवाइस खेत मन के निगरानी करही। एला अइसे घलोक कहे जा सकत हे के अब किसान के मोबाइल म ओखर जम्‍मा किसानी आ जाही। खेत ल का खातू के जरूरत हे, फसल म कीरा पतंगा के हमला, आवारा पशु मन के खेत म आए म एलर्ट करई, माटी के आद्रता, पीएच वेल्यू अऊ तापमान के पता बताय के संग सिंचाई पूरा होए तक के जानकारी ये डिवाइस ह मोबाइल के द्वारा किसान ल बताही।
ये डिवाइस चंदौली के बबुरी गांव निवासी मेरठ के आइआइएमटी विवि ले इलेक्ट्रॉनिक अउ कम्यूनिकेशन म रिसर्च करत संदीप वर्मा पुत्र संतोष कुमार ह प्रो-वीसी डॉ. दीपा शर्मा के निर्देशन अऊ वीसी प्रो. योगेश मोहन गुप्ता के संरक्षण म तियार करे हे। दू साल म कई पइत परीक्षण करके ये मां सुधार करे के बाद जुलाई म ये डिवाइस तियार होए हे। सूक्ष्म अउ छोटे उद्योग भारत सरकार ह एखर बर पांच लाख के फंडिंग घलोक करे हे।




का हे एपीएस डिवाइस
डिवाइस माइक्रो प्रोससर चिप बेस्ड हे। ये मां ह्यूमेंडिटी सेंसर, रेन सेंसर, फायर सेंसर, टेंप्रेचर सेंसर, इरीगेशन सेंसर अऊ मोशन सेंसर लगे हे। ये सौर ऊर्जा अऊ बिजली ले संचालित होथे। ये सबो सेंसर खेत के हर हलचल म नजर रखथे। एक एकड़ म ये काम करही। एखर से जादा क्षेत्रफल म अकतहा डिवाइस खेत म लगाना होही।




का काम करही ये डिवाइस
सेंसर लगे डिवाइस खेत म होही। जबकि कंट्रोलर नलकूप म। डिवाइस किसान के मोबाइल ले कनेक्ट रइही। खेत म ट्यूबवेल चलत हे अऊ पानी गिर गे त रेन सेंसर काम करही अउ ट्यूबवेल ल बंद कर देही। कहूं बारिश नइ होए हे अऊ माटी सूखाए लगही त सेंसर अपने आप मोटर ल चालू कर देही। ये मां वाटर लेबल तय करे के विकल्प तको रहिही।
खेत म कतका इंच पानी चाही एला सेट करे म जइसनेच खेत म पानी के तल ओ म पहुंचही मोटर बंद हो जाही। डिवाइस ये घलोक बताही के खेत म कब अऊ कऊन खाद के जरूरत हे। खेत म रात या दिन के समय जंगली जानवर आ गे त मोशन सेंसर मोबाइल म एलर्ट करही। खेत म कहूं तार बिछाए गे हे त किसान ओमा करेंट एक्टिवेट कर सकही।



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