अक्षय तृतीया विशेष : पुण्य सकेले के दिन आय अक्ती

रचना कड़ी ल चपक के पूरा रचना पढ़व ..

अक्ती तिहार – प्रदीप कुमार राठौर

छत्तीसगढ़ म हर तिहार ल हमन सुघ्घर रूप ले मनाथन। तिहार ह हमर घर, परिवार, समाज अउ संसकिरिती म रचे-बसे हावय जेखर कारन येखर हमर जीनगी म अब्बडेच़ महत्तम हे। तिहार ह हमर खुसी उत्साह के परतीक हावय जेला हमन सबो झन जुर-मिर के मनाथन। तिहार से हमन ल एक नवा उरजा मिलथे जेखर ले हमन अपन जीनगी म आने वाला कई परकार के बिघन-बाधा ल पार करके आघु बढ़े के सक्ती पाथन। पर आज के आघुनिकता के अंधा दउड़ म हमन अपन तीज-तिहार परिवारदार संगी-जवरिहां के संग मिल के मनाये के बजायय अकेल्ला मनानथ या मनाये ल छोड़ देहन। हमन के मानसिक दुख अउ अवसाद के एक परमुख कारन ये घलो हावय के हमन अपन तिहार ल मिर-जुर के मनाये ल भुलागेहन।
पूरा रचना पढ़व ..


पुण्य सकेले के दिन आय अक्ती – हीरालाल गुरूजी ‘समय’

हमर देस मा तिहार मनाय के परंपरा आदिकाल से चले आवत हे। भगवान ले मनौती करेबर, अशीस पायबर अउ मनौती पूरा होय के धन्यवाद देयबर तिहार मनाय जाथे। अइसने एक समिलहा तिहार बइसाख महिना के तीज के दिन मनाय जाथे जौन ला अक्ती तिहार कहे जाथे। अक्ती तिहार के छत्तीसगढ़ मा घलाव अबड़ मानता हे। घर परिवार,खेती किसानी, बर बिहाव आदि बर ए दिन ला बहुतेच शुभ मानथे। नउकर अउ मालिक के बीच गठजोड़ होय के तिहार आवय। अक्ती ला अक्षय तृतीया के नाम से जाने जाथे।जेकर मतलब होथे जौन कभू नइ सिराय।अक्तिहा से अक्ती बने हे ,अक्तिहा माने जादा।कहेे जाथे कि अक्ती के दिन जौन भी शुभ काम करही ओखर अक्तिहा फल मिलही। हमर शास्त्र अउ पुरान मन ओकरे सेती बताथे सिखाथे कि अक्ती के दिन जादा ले जादा दान धरम करव।एखर अक्तिहा पुण्य मिलही जौन बछरभर मा नइ सिराय।
पूरा रचना पढ़व ..



पुतरी पुतरा के बिहाव – प्रिया देवांगन ‘प्रियू’

छाये हावय मड़वा डारा, बाजा अब्बड़ बाजत हे।
छोटे बड़े सबो लइका मन, कूद कूद के नाचत हे।।
तँहू मन हा आके सुघ्घर, भड़ौनी गीत ल गाहू जी।
भेजत हावँव नेवता सब ला, लाड़ू खा के जाहू जी।।
पूरा रचना पढ़व ..



अक्षय तृतीया विशेष – महेन्‍द्र कुमार देवांगन ‘माटी’

हिन्दू धर्म में बहुत अकन तिहार मनाये जाथे । ये तिहार हा मनखे मे नवा जोश अउ उमंग पैदा करथे । आदमी तो रोज काम बुता करत रहिथे फेर काम ह कभू नइ सिराय । येकर सेती हमर पूर्वज मन ह कुछ विशेष तिथि ल तिहार के रुप में मनाय के संदेश दे हे ।वइसने एक तिहार अक्छय तृतीया के भी मनाय जाथे ।
पूरा रचना पढ़व ..



मजदूर – महेन्‍द्र कुमार देवांगन ‘माटी’

जांगर टोर मेहनत करथे, माथ पसीना ओगराथे ।
मेहनत ले जे डरे नहीं, उही मजदूर कहाथे ।
बड़े बिहनिया सुत उठके, बासी धर के जाथे ।
दिन भर बुता काम करके, संझा बेरा घर आथे ।
पूरा रचना पढ़व ..


अकती बिहाव – गोकुल राम साहू

मड़वा गड़ाबो अँगना मा,
सुग्घर छाबो हरियर डारा।
नेवता देबो बिहाव के,
गाँव सहर आरा पारा।।

सुग्घर लगन हावे अकती के,
चलो चुलमाटी जाबो।
शीतला दाई के अँगना ले,
सुग्घर चुलमाटी लाबो।।
पूरा रचना पढ़व ..



नंदावत हे अकती तिहार – गोकुल राम साहू

अकती तिहार हमर छत्तीसगढ़ अँचल के बहुँत बढ़िया प्रसिद्ध परंपरा आय। ये तिहार ला छत्तीसगढ़ के गाँव-गाँव मे बड़ा हर्सोल्लास के संग मनाय जाथे। बैशाख महीना के अँजोरी पाख के तीसरा दिन मा मनाय जाथे।आज के जुग मा नवा-नवा मनखे अउ नवा-नवा जमाना के आय ले अउ हमर जुन्ना सियान मन के नंदाय ले हमर अतेक सुग्घर तिहार हा घलो नंदावत हे। पहेली के सियान मन अकती तिहार के पहेली ले जोरा करत राहय।अकती तिहार आही ता गाँव के डिही डोंगर ठाकुर दिया में अउ शीतला दाई में दोना में धान चइघाके किसानी काम के सुरू करबो कहिके। अउ अकती के दिन ले किसानी काम ला सुरू करय। अउ आज के जुग मा कतको जघा सुने मा मिलथे के ये दोना चघाय के परंपरा हा घलो नंदावत हे।
पूरा रचना पढ़व ..



Related posts